Happiness |Cyanide And Happiness | Life Liberty And The Pursuit Of Happiness

Happiness |Cyanide And Happiness | Life Liberty And The Pursuit Of Happiness

पराधीन मनुष्य सुख आनन्द को किस प्रकार जान सकता है ?

अपने सुख के दिनों का स्मरण करने से बड़ा दुख कोई नही है |

भक्त और ज्ञानी को सदा सुख प्राप्त होता है |

वे व्यक्ति जो बड़ी आयु में महान खुशियाँ प्राप्त करते हैं ,वही होते हैं , जो युवावस्था में छोटी खुशियों का भी त्याग करते हैं |

संपन्नता मन से होती है ,धन से नहीं | बड़प्पन बुद्धि से होता है ,उम्र से नहीं |

असफलता निराशा का सूत्र नहीं है ,अपितु वह तो नई प्रेरणा है |

चित जब अंतर्मुख रहता है ,तब जो शान्ति मिलती है ,आत्मसुख की झलक मिलती हैं ,इसके आगे संसार के पदार्थ आकर्षित नहीं कर सकते | एक बार खीर खाकर तृप्त हुए हों तो फिर भिखारिन के जूठे टुकड़े तुम्हें आकर्षित नहीं करेंगे | ऐसे ही मन को एक बार परमात्मा का सुख मिल जाए ,एक बार ध्यान का सुख मिल जाए तो फिर मन तुम्हें धोखा नहीं देगा |

सज्जन मनुष्य उन चीजों के लिए शोक नहीं मनाते ,जो उनके पास नहीं हैं | वे उन चीजों के लिए आनंद महसूस करते हैं ,जो उनके पास हैं |

सुख कोई बाहर से मिलने वाली वस्तु नहीं है , वह तो आपको भीतर ही है ,किन्तु वह तब प्राप्त नहीं होगा ,जब तक अहम् है |

आप जो हैं ,उससे अधिक अपने आपको समझते हैं ,इसलिए सुखी नहीं रह पाते |

जो कुछ अपने पास है ,उसी संतुष्ट रहना तथा किसी वस्तु का अभाव अनुभव न करना ही वास्तव में सच्चा सुख है |

धर्मराज !सन्यास खोजना ,कायरता मन की | है सच्चा मनुजत्व ग्रंथियाँ सुलझाना जीवन की | दुर्लभ नहीं मनुज के हिट ,निज वैयक्तिक सुख पाना | किन्तु कठिन है कोटि -कोटि मनुजों को सुखी बनाना ||

Updated: April 17, 2021 — 6:20 am

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