Diwali Essay in Hindi दिपावली पर निबन्ध हिन्दी मैं

Diwali Essay in hindi

Diwali Essay in Hindi

भारत त्यौहारो का देश है ,यह हर्ष उल्लास और उत्साह का त्यौहार है। यहां समय समय पर विभिन जातीय समुदाय द्वारा अपने अपने त्यौहार मनाये जाते है। जैसे – होली, रक्षाबंधन,जन्माष्टमी , महा शिव रात्री , दिवाली – दीपावली , दशहरा ,और इन सभी त्योहारों  में दिवाली सर्वाधिक लोक प्रिय है। दीपो का त्यौहार दीपावली दिवाली जैसे अनेक नामो से पुकारा जाने वाला आनंद और प्रकाश का त्यौहार है।

यह त्यौहार भारतीय सभ्यता संस्कृति का एक सर्वपरहमुख त्यौहार है।  यह ऋतु परिवर्तन का सूचक है।  इसके साथ अनेक धार्मिक मान्यताये भी जुडी है।  यह उत्साह उलाश , भाई चारे , साफ सफाई तथा पूजा अर्चना का त्यौहार है।  यह त्यौहार प्रति वर्ष कार्तिक माह की अमावस्य को मनाया जाता है।

दीपावली का त्यौहार मनाने का परम्परा कब और क्यों आरम्भ हुए कहते है ; इस दिन अयोध्या के राजा रामचंद्र लंका के अत्याचारी राजा रावण का नाश कर और चौदह वर्ष का वनवास काटकर अयोधा वापस लोटे  थे।  उनकी विजय और आगमन  खुसी के प्रतीक रूप में अयोधावासियो ने नगर को घी के दीपो से प्रकासित  किया था।

प्र्सनता सूचक पटाके और आतिशबाजी का प्रदर्शन का परस्पर मिठाइयां बाटी थी।  उसी  दिन का इसमरण करने तथा अज्ञान अंधकार एवं अन्याय अत्याचार  विरुद्ध हमेसा संघर्ष करते रहने की चेतना उजाकर किये रहने के लिए  दिन से प्रतेक वर्ष भारतवासी इस दिन दीप जलाकर हार्थिक हर्सौलास प्रकट करते और मिठाई खिलाकर अपनी प्र्सनता का आदान प्रदान करते है।

Happy Diwali Shayari Images

इस दिन जेन तीर्थ कर भगवान महावीर ने जैतन्य की प्राण प्रतिस्ठा करते हुवे महानिर्माण प्राप्त  किया था।  स्वामी दयानन्द ने भी इस दिन निर्माण प्राप्त किये थे सिख सप्रदाय के छटे गुरु हरगोविंदजी को बद्री ग्रह से छोड़ा गया था।  इसलिए लोगो ने दीपमाला सजाई थी।

दीपावली आने तक ऋतू के प्रभाव से वर्षा ऋतू प्राय समाप्त हो चुकी होती है मौसम के गुलामी ठंडल  गुलने लगती है आकाश पर खंजन पक्छियो की पंकितयाँ टोलिया उड़कर उसकी नील निर्व्रता को चार चाँद लगा दिया करते है।  राजहंस मानसरोवर में लोट आते हे नदिया सरोवर का जल इस समय तक स्वछ और निर्मल हो चुकी होता है।

प्रकृति में न्य निखार और खुमार आने लगता है।  इन सबसे प्रेणा लेकर  लोग बाग भी अपने अपने घर साफ बनाकर रंग रोगन करवाने है  इस प्रकार प्रकृति उगेर मानव समाज दोनों ही जैसे गंदगी के अंधकार को दूर भगा प्रकाश का पर्व दीपावली मनाने की तैयारी करने लगते है।  यह  तैयारी दुकानों बाजारों की सजावट और रोक दिखाई देने लगते है।

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दिवाली को धूम धाम से मनाने लिए हफ्तों पहले तेयारिया किया जाता है , 5 – 6 दिन पहले फल मेवों और मिठाइयों की दुकान सज धज कर  खरीदारों का आकर्स्न बन जाता है।  मिटी के खिलोने दीपक अन्य प्रकार की मुर्तिया चित्र बनाने वाली बजारो में आजाते है।

पटाखे आदिसबजी के स्टालों पर खरीदारो की भीड़  लग जाते हे खिल बतासे खिलोने मिठाइयां बनाए व खरीदी जाते हे  जिन्हे बेचने के लिए बजारो को दुल्हन   दीपावली की रात  दीपको और बिजली के और छोटे बच्चो और बड़े बचो से घेरो दुकानों  वातावरण पूरी तरह से जगमगा उठता हे.

दीपावली के लिए नए नए कपड़े सिलए जाते है मिठाई पकवान बनाये जाते है घर घर में लक्छमी का पूजन  सुब कामनाये का आदान प्रदान मुँह मीठा किया कराया जाता कराया जाता है व्यापारी लक्छमी पूजन के  बही कहते आरम्भ करते हे इस प्रकार दीपावली प्र्सनता और का त्यौहार है।  जुवा खेलना , शराब पीना , जैसे कुछ कृतितिया भीं स्वार्थी लोगो ने इस पवित्र त्यौहार  जोड़ रखी है उनमे होने वाली दिवाली से सजन सावधाहे न ही त्यौहार को आनंदपूर्ण बना सकते है।

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