Best Introspection Quotes of Life

Best Introspection Quotes of Life आत्ममंथन अनमोल वचन

मन -बड़ाई बड़ी छुरी है ,विष भरा सोने का घड़ा है |

स्वाधीनता का पक्षा ईश्वर का पक्षा है |

जो मेरे साथ भलाई करता है , वह मुझे भला होना सिखाता है |

वह महान नहीं है ,जो बहुत भला नहीं है |

बीस वर्ष की आयु में संकल्प शासन करता है ,तीस वर्ष में बुद्धि ,चालीस वर्ष में विवेक |

जिस प्रकार औषधि शरीर के सब रोगों को दूर कर देती है , उसी प्रकार ईश चिंतन से मन के कलेश दूर हो जाते हैं |

शरीर से इन्द्रियों श्रेष्ठ हैं | इन्द्रियों से मन श्रेष्ठ है | मन से बुद्धि श्रेष्ठ है और जो बुद्धि से भी श्रेष्ठ है -वह आत्मा है |

शर्म की कशिश हुस्न से ज्यादा होती है |

उसकी बुद्धि स्थिर रह सकती है जिसकी इन्द्रियाँ वश में हों |

ख़ामोशी इजहारे नफरत का सबसे बेहतर तरीका है |

जिसे पास कम है वह गरीब नहीं बल्कि ,जो ज्यादा की हवस रखता है वह गरीब है |

जय उसी की होती है ,जो अपनी को संकट में डालकर कार्य सम्पन्न करते हैं | जय ,कायरों की कभी नहीं होती |

उदारता अधिक देने में नहीं ,वरन समझदारी से देने में है |

जो बात अपने विरुद्ध हो वह दूसरों के साथ न करें |

भाग्य को वही कोसते हैं जो कर्महीन हैं |

ऋण हो जाए इतना खर्च मत करना ,पाप हो ऐसे कमाई मत करना ,क्लेश हो ऐसा मत बोलना ,रोग हो ऐसा मत खाना और शरीर दिखाई दे ऐसे कपड़े मत पहनना |

जो अपने घर सुधार न कर सका हो ,उसको दूसरों को सुधारने की चेष्ठा करना बड़ी भारी मूर्खता है |

एक गद्दार दोस्त से एक वफादार दुश्मन अच्छा होता है |

साम ,दाम ,दंड ,भेद आदि उपायों में साम पर ही भरोसा करनी चाहिए |

दूसरों के कठोर वचन सुनने की आदत डालनी चाहिए |

किसी नए व्यक्ति ,या जो हंसी मजाक पसंद न करते हों ,के साथ हंसी मजाक नहीं करना चाहिए |

हमेशा माँगने का अभ्यास नहीं करना चाहिए |

जो विजय ,बुद्धि ,विद्या ,कुल और आयु में श्रेष्ठ हो ,जो सिद्ध पुरुष हों ,जो आचार्य हों, उनकी पूजा करनी चाहिए |

यथा समय देवताओं की पूजा करें |

यथा समय हवन ,यज्ञ करते और दान देते रहना चाहिए |

अतिथियों का आदर सत्कार करें |

सामयिक ,हितकर ,परिमित ,मधुर और कोमल वचन बोलने चाहिए |

दिन रात गधे की तरह लदेरहे ,खूब धन कमाया ,स्वस्थ्य गँवाया ,फिर खूब धन व्यय किया ,किन्तु वह स्वास्थ्य फिर वापस नहीं मिला |

स्नेही व्यक्ति किसी कारण से विकारयुक्त हो जाने पर भी बाद में अपना स्वभाव पुनः ग्रहण कर लेता है | जैसे आग से तपा हुआ पानी ,पुनः शीतल हो जाता है |

ईर्ष्या मक्खी की तरह है ,जो शरीर के अच्छे अंगों पर नहीं बल्कि जख्मी पर बैठती है |

ईश्वर देखता है और चुप रहता है | पड़ोसी देखता नहीं ,शोर मचाता है |

यदि आपके एक शब्द से भी किसी को पीड़ा होती है ,तो आपके दवरा किया गया नेक कार्य व्यर्थ है |

दुनिया में रहना मुश्किल नहीं बल्कि दुनिया की मुश्किलात से टकराना मुश्किल है|

Updated: April 8, 2021 — 10:20 am

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