Best Humans Quotes|Life Quotes|Positive Inspirational Life Quotes

Best Humans Quotes Life Quotes Positive Inspirational Life Quotes मनुष्यों के अनमोल विचार।

God is such a fast whose center is everywhere but not its circumference

If man wins this body item, then who in the world can rule it? यदि इस देह रुपी वस्तु को मनुष्य जीत ले ,तो फिर संसार में कौन उस पर शासन चला सकता है ?

विनोबा भावे

It is the nature of men with advanced mind that they show great valor on the elders, not on the weak. उन्नत चित वाले पुरुषों का यह स्वभाव है कि वे बड़ों पर महान पराक्रम दिखाते हैं ,दुर्बलों पर नहीं |

विष्णु शर्मा

Desire erased, worried, Manua nonchalant. Those who do not need a tortoise, so emperor. चाह मिटी ,चिन्ता गई ,मनुआ बेपरवाह | जिनको कछू न चाहिए ,सो ही शहंशाह ||

कबीर

What will he do to love and faith, what will he do to God? A person born in the lap, could not love a human being. क्या करेगा प्यार व ईमान को ,क्या करेगा प्यार वह भगवान को | जन्म लेकर गोद में इंसान को ,प्यार कर पाया न जो इंसान को ||

नीरज

Man is not a slave to circumstances, but a master of it. मनुष्य परिस्थितियों का दास नहीं ,वरन उसका स्वामी है |

बेंजामिन डिजराइली

Inaction is a curse for humans. निष्क्रियता मनुष्य के लिए अभिशाप है |

गांधी जी

What is the confidence of Jindagani? Man is a bubble of water. क्या भरोसा है जिंदगानी का | आदमी बुलबुला है पानी का |

जितना बड़ा मनुष्य लोभ होता है ,उतनी ही बड़ी उसकी निराशा और असफलता होती है | जितनी अधिक धन -दौलत होती है ,उतना अधिक मनुष्य दुःखों के जाल में फँसता है |

सरमद

लोभ ,लालसा और कामना के जाल में फँसा हुआ व्यक्ति हमेशा अतृप्त रहता है ,भले ही सारे संसार का राज्य क्यों न मिल जाये |

सरमद

जो लोग आज एक बात को बिना सोचे ही कर डालते हैं और कल उसे भूल कह कर अलग जा खड़े होते हैं ,वे यह बिल्कुल नहीं सोचते कि उनके इस अतिरिक्त स्वरूप के कारण कितनी निर्मल और निर्दोष भावनाओं की हत्या हो जाया करती है |

भगवती प्रसाद वाजपेयी

जब मजबूरी आ जाए तो मनुष्य को उससे समझौता कर लेनी चाहिए और अपना रास्ता स्वयं बना लेना चाहिए |

बट्रेण्ड रसेल
Man is not a slave to circumstances, but a master of it.

मनुष्य अकेला पाप करके खूब धन कमाता है और उससे बहुत लोग मौज उड़ाते हैं | मौज उड़ाने वाले छूट जाते हैं किन्तु पाप करने वाला उस पाप का भागी बना रहता है |

रामलाल

जो व्यक्ति कदम -दर कदम चल कर चोटी पर पहुँचता है वह उस व्यक्ति से कहीं ज्यादा सम्मान पाता है ,जो चोटी पर हैलीकाप्टर से पहुँचता है |

अनेक और बड़ी भूलें करके ही कोई मनुष्य महान बन सकता है |

छिपे हुए भय की भावना ही मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है उसे केवल मनोबल के द्वारा ही बाहर निकाला जा सकता है |

होरेस फ्लेपर

मनुष्य की शोभा कपड़ों से नहीं वरन वाणी ,व्यवहार और कर्म सुगंध से होती है |

दादा भगवान

चलता हुआ मनुष्य ही मधु पाता है ,चलता हुआ मनुष्य ही स्वादिष्ट फल खाता है | सूर्य का परिभ्र्रमण देखो जो नित्य चलता हुआ कभी आलस्य नहीं करता इसलिए चलते रहो -चलते रहो |

एतरेय उपनिषद

मनुष्य की गहरी से गहरी और पहली बीमारी अहंकार है | जहाँ अहंकार है ,वहाँ दया झूठी है ,वहाँ अहिंसा झूठी है ,वहाँ शान्ति झूठी है ,वहाँ मंगल कल्याण और लोकहित की बातें झूठी हैं |

मुनि नयन सागर

मनुष्य ही एक मात्र ऐसा प्राणी है जिसके लिए अपना ही अस्तित्व एक समस्या है ,जो उसे स्वयं हल करना है |

धूमकेतु

मनुष्य !गिरना तेरी हार नहीं है ,क्योंकि तू मनुष्य है ,अवतार नहीं है | फिर उठ !

दादा भगवान

जीवन का कोई भी क्षेत्र हो ऊँचाइयों पर पहुँचने के बाद भी सहज और सरल बना रहना श्रेष्ठ मनुष्य का गुण है |

माँ कनकेश्वरी देवी

जो मनुष्य मन में उठे क्रोध को दौड़ते हुए रथ के समान शीघ्र रोक लेता है ,उसी को मैं सारथी समझता हूँ |

गौतम बुद्ध

मनुष्य के सम्पूर्ण पापों को मैं उनके स्वभाव की अपेक्षा उनकी बीमारी समझता हूँ |

गौतम बुद्ध

मनुष्य को निरोग बनाने वाले उसके विचार हैं ,औषधि नहीं |

माइकेल एंजलि

मनुष्य की बुराइयाँ दीर्घ -जीवी होती हैं | उसकी अच्छाइयाँ अल्पायु होती हैं |

शेक्सपियर

मनुष्य झूठ बोलकर जीवन की काफी सम्पदा खो देता है |

शरतचन्द्र

जिसमें अच्छी सेवा की योग्यता ,ऐसा मनुष्य कभी भी बुरा नहीं हो सकता |

बर्क

सद्व्यहार ही मनुष्य का सर्वश्रेष्ठ गुण है | मानसिक रूप से विनम्र बनो ,मजबूत और सुदृढ़ होने में नहीं लचीला होने में शक्ति छिपी है | आँधी -तूफान में लचीले पेड़ ही खड़े रह पाते हैं |

जे.कृष्णामूर्ति

अधिक धनी मनुष्य को तो अपने सगे पुत्र से भी डर लगता है |

मनुष्य के श्रम का सर्वोच्च पारितोषिक उसे उपलब्ध पुरस्कार नहीं ,वरन उसका सम्पूर्ण जीवन है |

रस्किन

वह व्यक्ति अधिक सम्पन्न और सुखी है जिसकी संतान अच्छी हो |

रामलाल

छोटों के साथ सद्व्यवहार करके बड़ा मनुष्य अपने बड़प्पन को प्रकट करता है |

चिन्तन और मनन करने के बाद अच्छी बातों को जीवन में उतारने वाले मानव का जीवन जी सार्थक है |

संत तुकराम

जो मनुष्य अपनी निंदा सह लेता है ,उसने मानो सारे जगत पर विजय प्राप्त करली |

वेदव्यास

प्रत्येक व्यक्ति के अंदर जलने वाली सात्विकता की अग्नि धर्म प्रज्वलित करती है |

डा ,राधाकृष्ण

वह मनुष्य ,चाहे वह राजा हो या किसान ,सबसे भाग्यवान वह है जिसे अपने घर में शांति मिलती है |

गेटे

आज निश्चित है ,जो कल है वह अनिश्चित है |

शतपथ ब्राह्मण

वही मनुष्य श्रेष्ठ है जो पराये को भी अपना बना ले |

विमल मित्र

मनुष्य की शांति की परख समाज में हो सकती है ,हिमालय की चोटी पर नहीं |

महात्मा गाँधी

मेरा विश्वास है कि कोई भी आवश्यकता न होना दिव्य है | जिस मनुष्य में जितनी का आवश्यकता होती है ,उतना ही वह ईश्वर के निकट होता है |

सुकरात

मनुष्य को अपने साधनों और शक्तियों के अनुसार ही कामना करते हुए पुरुषार्थ को उस पर लगा देना चाहिए |

आचार्य श्रीराम शर्मा

समर्पण मानव को आत्मा -संतोष प्रदान करता है | जो व्यक्ति अपने धन का दान करते हैं ,परोपकार पर व्यय करते हैं ,वे सात्विक संतुष्टि में जीते हैं |

स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि

मनुष्य का स्वभाव उसे विश्वसनीय बनाता है न कि उसकी सम्पति |

अरस्तु

सर्वश्रेष्ठ पूजा वह होती है जब मनुष्य कृष्ण ,बुद्ध व क्राइस्ट के रूप में पूजा जाय |

स्वामी विवेकानन्द

गुणियों में दोष भी गुण हो जाते हैं ,जबकि महान गुण भी दुष्ट व्यक्ति में दोष हो जाते हैं | गायों द्वारा खाई गई घास दूध बन जाती है और साँपों दवरा पिया गया दूध विष बन जाता है |

मनुष्य की सर्व श्रेष्ठ देन उसके श्रेष्ठ विचार हैं ,जो हजारों वर्षो तक आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करते रहते हैं

सैमुअल स्माइल्स

सत्य उस मानव के सामने स्वयं ही प्रकट हो जाता है जो सत्य को खोजने के लिए निकल पड़ता है |

श्री विधानंद

जो व्यक्ति उपयोगी और अनुपयोगी बातों का अंतर समझ लेते हैं ,वे कभी व्यर्थ शब्द व्यक्त नहीं करते |

तिरुवल्लुवर

जो मनुष्य अपने क्रोध को अपने ऊपर झेल लेता है ,वह दूसरों के क्रोध से बच जाता है |

वर्कले

मनुष्य को अन्य प्राणियों से प्रेम करना चाहिए ,क्योंकि वे अन्य प्राणी और कोई नहीं -मनुष्य स्वयं ही हैं |

स्वामी विवेकानन्द

गलती तो आदमी से होती है ,उससे कोई आदमी बच नहीं सकता | लेकिन गलती होने से बड़ा खतरा नहीं है | बड़ा खतरा उस गलती को छिपाने में है | उसके लिए झूठ बोलना पड़ता है | इस तरह गलतियों की एक कड़ी बन जाती है |

महात्मा गाँधी

मनुष्य स्वभाव से सम्पूर्ण है | अवतार या महापुरुष इस सम्पूर्णता को प्रकट करते हैं ,परन्तु वास्तविकता यह है कि यह सम्पूर्णता हम सबके अन्दर है |

स्वामी विवेकानन्द

मनुष्य को पढ़ो ,वही एक जीवन्त कविता है |

स्वामी विवेकानंद

मनुष्य की सच्ची परीक्षा विपत्ति में ही होती है |

महात्मा गाँधी

हिम्मत से रहित व्यक्ति का रद्दी के कागज की तरह कोई आदर नहीं करता |

कृपाराम

मनुष्य वह है जो दूसरों के लिए कष्ट सहे और आवश्यकता पड़ने पर अपने प्राण भी दे दे |

मेरा विश्वास है कि आज का सम्पूर्ण चिकित्सा शास्त्र यदि समुद्र में डूबो दिया जाए तो यह मनुष्यों का परम कल्याण होगा ,किन्तु बेचारी मछलियों का परम दुर्भाग्य होगा |

होम्य और डॉ.हैनिमैन

सांसारिक आकांक्षाएँ मनुष्य को बाँधती और घसीटती हैं |

स्वामी विवेकानंद

हृदयहीन मनुष्य से उपासना नहीं होती |

शेखसादी

व्यक्ति के अंतर्मन को परखना चाहिए |

दशवैकलिक

जो बलवान होकर निर्बल की रक्षा करता है ,वही मनुष्य कहलाता है |

स्वामी दयानन्द

आदमी पहले शराब पीता है ,फिर शराब को पीती है और अन्त में शराब आदमी को ही पीने लगती है |

जापानी लोकोक्ति

मनुष्य सुख और दुख सहने के लिए बनाया गया है ,वे पीसते दूसरों को हैं और चिल्लाते स्वयं हैं |

रामकृष्ण परमहंस

कलह से मनुष्यों के घर नष्ट हो जाते हैं | कुवाक्य बोलने से मित्रता नष्ट हो जाती है | बुरे शासन से राष्ट्र नष्ट हो जाते हैं | कुकर्म से मनुष्य का यश नष्ट हो जाता है |

हितोपदेश

जो कमाई शुद्ध है ,उसका उपयोग करने वाला व्यक्ति ही वास्तव में शुद्ध कहा जा सकता | पसीने की कमाई से ही मनुष्य सुखी होता है और उसका धन स्थायी रहता है |

अथर्ववेद

जब सारी वासनाओं का अंत हो जायेगा ,तब यह नश्वर मानव ही अमर बनेगा -तब यह मानव ही ईश्वर बन जायेगा |

स्वामी विवेकानंद

वही मनुष्य महान है जो भीड़ की प्रशंसा की उपेक्षा कर सकता है और उसकी कृपा से स्वतंत्र रहकर प्रसन्न रहता है |

एडिसन

उस मनुष्य पर विश्वास करो जो बोलने में संकोच करता है ,पर कार्य मे परिश्रमी और तत्पर है ,लेकिन लम्बे तर्कों वाले से सावधान रहो |

जॉंर्ज सांतायन

हमारी बुद्धियाँ विविध प्रकार की हैं | मनुष्य के कर्म भी विविध प्रकार के हैं |

ऋग्वेद

जीवित रहने को तो कीट -पतंगे भी रहते हैं ,किन्तु मनुष्य को कीट -पतंगों की भाँति नही जीना चाहिए |

हरिकृष्ण प्रेमी

उद्यम तो मनुष्य को करना चाहिए ,वह तो उसका कर्तव्य है | गाय न पालकर भी बिल्ली अपने उद्यम से नित्य दूध पीती है |

संस्कृत लोकोक्ति

कार्यकुशल आदमी के लिए यश और धन की कमी नहीं होती |

इस संसार में कोई मनुष्य स्वभावतः किसी के लिए उदार ,प्रिय या दुष्ट नही होता ,अपने कर्म ही मनुष्य को संसार में गौरव अथवा पतन की ओर ले जाते हैं |

नारायण पंडित

मनुष्य में जो स्वाभाविक बल है ,उसकी अभीव्यक्ति धर्म है |

विवेकानन्द

सभी मनुष्यों की श्रद्धा उनके अंतःकरण के अनुरुप होती है |

वेदव्यास

जो सचमुच मनुष्य है ,वह विद्रोह करेगा ,अन्याय के प्रति विद्रोह |

विमल मित्र

यदि मनुष्य प्रतीक्षा करे तो हर वस्तु प्राप्त हो जाती है| डिजरायली

मनुष्य वस्त्रों के बिना तो शोभित हो सकता है ,किन्तु लज्जा धैर्य से रहित होने पर नहीं |

श्री हर्ष

जब मनुष्य के बुरे दिन हों उसे अत्यधिक उपदेश देने की अपेक्षा उसकी थोड़ी सहायता करदेना ज्यादा अच्छा है |

बुलवर

यदि मनुष्य पाप करभी ले तो उसे पुनः न दोहराए न उसे छुपाए और न उसमें रत हो ,पाप का संचय ही सब दुखों का मूल है |

गौतम बुद्ध

जैसे तिनका हवा का रुख बताता है वैसे ही मामूली घटनाएं भी मनुष्य के हृदय की वृत्ति बताती है |

महात्मा गाँधी

किसी कार्य को खूबसूरती से करने के लिए मनुष्य को उसे स्वयं करना चाहिए |

नेपोलियन

प्रेत्यक मनुष्य को अपना जीवन प्रिय होता है ,परन्तु महान पुरुष को अपनी इज्जत जीवन से खिन अधिक मूल्यवान और प्रिय होती है |

शेक्सपियर

कभी -कभी जीवन में ऐसी घटनाएं हो जाती है ,जो क्षण मात्र में मनुष्य का रुप पलट देती है |

प्रेमचंद

जो पुरुष पवित्र होकर जगत के लिए अपना सर्वस्व अर्पण कर देता है ,वह चक्रवर्ती से भी अधिक सत्ता भोगता है |

महात्मा गाँधी

मनुष्य के भीतर जो कुछ सर्वोत्तम है उसका विकास गुण ग्राहकता एवं प्रोत्साहन दवरा ही किया जा सकता है |

चार्ल्स वेब

जो मनुष्य एक पाठशाला खोलता है वह संसार का एक जेलखाना बन्द करता है |

ह्यूगो

मनुष्य मानव के साथ केवल भलाई करके ही अपने को देवतुल्य बनाते हैं |

सिसरो

मनुष्य उतना ही महान होगा जितना वह अपनी आत्मा सत्य ,त्याग ,दया ,प्रेम और शक्ति का विकास करेगा |

स्वेट मार्डेन

मनुष्य ही परमात्मा का सर्वोच्च साक्षात मन्दिर है,इसलिए साक्षात देवता की पूजा करो |

स्वामी विवेकानन्द

बलवान मनुष्य यदि अकेला रहे तो ,और बलवान बन जाता है |

हिटलर

हीरे परखने की आशा जौहरी से ही की जा सकती है |

प्रेमचंद

तीन सबसे बड़ी उपाधियाँ जो मनुष्य को दी जा सकती है -शहीद ,वीर और सन्त |

ग्लैडस्टन

प्रसिध्द होने का यह एक दंड है कि मनुष्य को निरन्तर उन्नतिशील बने रहना पड़ता है |

चैपिन

यदि मनुष्य सीखना चाहे तो उसकी हर एक भूल उसे कुछ न कुछ शिक्षा अवश्य दे सकती है |

डिकेन्स

मनुष्य अपना स्वामी नहीं है ,वह परिस्थितियों दास है ,विवश है ,वह कर्ता नहीं है ,वह केवल साधन है |

भगवती चरण वर्मा

अविनय मनुष्य को शोभा नहीं देती ,चाहे उसका उपयोग अन्यायी और विपक्षी के प्रति ही क्यों न हो ?

तिरुवल्लुवर

मनुष्य माल से धनी नहीं कहा जा सकता ,अपितु उदार चित होने से |

शेखसादी

हम लोगों को सुधार नही सकते बल्कि हमारी कोशिश होनी चाहिए कि हम खुद को बेहतर बनाएं |

जोसेफ फोर्ट न्यूटन

मनुष्य का व्यक्तित्व उसके परिश्रमी पर निर्भर करता है |

ज.नेहरू

दैहिक प्यास के अलावा और भी एक प्यास मनुष्य में होती है |

रविंद्र नाथ टैगोर

मनुष्य आचरण ही बताता है कि वह कुलीन है अथवा अकुलीन ,शूरवीर है अथवा कायर ,पवित्र है अथवा अपवित्र |

बाल्मीकि रामायण

यदि हम यह यथार्थ रीति समझ लें कि युद्ध मनुष्यों के मन में पैदा होते हैं ,तो हम मानसिक शांति के लिए और अधिक प्रयास करेंगे |

मनुष्य बूढ़ा हो जाता है ,परन्तु उसका लोभ कभी बूढ़ा नहीं होता |

सुदर्शन

ऐसा कोई अक्षर नहीं ,जो मंत्र न हो ,ऐसी कोई जड़ी महि ,जो औषधि न हो | ऐसा कोई मनुष्य नहीं ,जो काम का न हो | इनको यथायोग्य काम में लेने वाले मुश्किल से मिलते हैं |

शुक्रनीति

व्यस्त मनुष्य को आँसू बहाने की फुर्सत नहीं है |

बायरन

जो व्यक्ति जब तक प्रसन्नता से मरने को तैयार नहीं रहता ,जीवन का सच्चा आनंद नहीं पा सकता |

सेनेगा

इस बात का महत्व नहीं है कि मनुष्य मरता किस तरह है ,अपितु महत्व की बात यह है कि वह जीया किस तरह है ?

समझदार वह है जो बोले कम और सुने ज्यादा |

सबसे कमजोर वह है जो अपना राज भी छिपा न सके |

मनुष्य का अहंकार ऐसा है कि वह अपने को गलत कभी मानता ही नहीं |

जिस शख्स के दिल में लालच ने कब्जा जमा लिया वह हमेशा स्रब और दिली इत्मीनान की दौलत से महरुम रहता है |

उत्तरदायित्व मनुष्य को अपने आप समझदार बना देता है |

If a man is unable to find peace inside himself, how can he get anywhere else in this world. यदि मनुष्य को अपने ही अंदर शांति नहीं मिल पाती तो उसे इस विश्व में कहीं और कैसे पा सकता है |

अतिथि सत्कार से मनुष्य देवत्व को प्राप्त होता है |

If a man is unable to find peace inside himself, how can he get anywhere else in this world.

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