Aspire | Streetcar Named Desire | Define Desire | ख्वाहिश | इच्छा

Aspire | Streetcar Named Desire | Define Desire

आरजुओं और ख्वाहिशों पर काबू पाना फरिश्तों की सिफत है ,और उनके काबू में आ जाना मवेशियों की |

हँसने और प्रसन्न रहने में कुछ प्रयास की आवश्यकता है ,अपने को प्रसन्न रखना भी कला है |

अगर पहाड़ को सरकाने की ख्वाहिश है ,तो पहले जर्रों को सरकाना सीखो |

आज़ादी प्यारी है तो अपने अंदर आज़ाद देश की ख्वाहिश पैदा करो |

ख्वाहिशों और उमंगों की हद भी एक उम्र तक महसूस हो जाती है ,जब उम्र ढल जाए तो तमन्नाएं दम तोड़ देती हैं |

हम जरूरत से बहुत ज्यादा की तमन्ना करते हैं ,इसीलिए नाकाम होते हैं |

जब तुम तमन्नाएं करते -करते दूर जा पहुँचो तो मौत अचानक आमद को भी याद रखो |

सीमित इच्छा सर्वोच्च परिणाम पर ले जाती है |

तू चाहता है कि तेरी सब इच्छाएँ पूरी हो जायें | जरा सोचकर तो देख | यदि तेरी सारी इच्छाएँ पूरी भी हो जायें ,चाँद -सूरज पर तेरा हुक्म चलने लगे ,सारे राजा -महाराजा तेरे गुलाम बन जायें तो भी तुझें इस संसार से एक दिन जाना ही होगा |

यदि तू चाहता कि तुझ पर ईश्वर की कृपा -दृष्टि बनी रहे और तुझे लोक -परलोक में शांति मिले तो तू उस ईश्वर के ध्यान को अपनी पूँजी बना ले और उसके प्यार में हमेशा डूबा रह |

अपनी इच्छा से दुःख आता है ,इच्छा से भय आता है ,जो इच्छाओं से मुक्त है वह न दुःख जानता है न भय |

जहाँ इच्छा प्रबल होती है ,वहाँ कठिनाइयाँ प्रबल नहीं हो सकती |

न मैं चाहता मुक्ति को प्राप्त करना ,न मैं चाहता व्यक्ति का रूप धरना | सभी विश्व मेरा ,सभी प्राण मेरे ,चलूँगा सभी विश्व को साथ घेरे ||

इच्छाओं से ऊपर उठ जाओ ,पूरी हो जाएँगी | मॉंगोंगे तो उनकी पूर्ति तुमसे और दूर जा पड़ेंगी |

सुख सुविधा बत्ती की सुगंध की तरह थोड़ी देर सुवासित रहती है बाद में बचती है राख |

आवश्यकता की वस्तुओं को छोड़कर शोष वस्तुओं से नाता तोडना जरूरी है |

बिना उत्साह विवेक मंद गति है ,बिना विवेक उत्साह सिर जोर है ,अतः उत्साह हमारे हमारे विवेक को प्रेरणा दे और विवेक हमारे उत्साह को अंकुश में रखे |

वह शासक अत्याचारी है ,जो अपनी इच्छा के अतिरिक्त कोई नियम नहीं जानता |

आवश्यकता तो भिखारी की भी पूरी हो जाती है ,जबकि इच्छाएँ करोड़पति की भी अधूरी ही रह जाती हैं |

जिस राष्ट्र के विभिन्न वर्ग तिनकों की तरह एक प्राण हो जाएँ ,उस राष्ट्र को कोई नहीं जीत सकता |

उत्साही ,आलसयहीन ,बहादुर और पक्की मित्रता निभाने वाले मनुष्य के पास लक्ष्मी निवास करने के लिए स्वयं चली आती है |

हँसमुख और प्रसन्न रहने में कुछ प्रयास की आवश्यकता है ,अपने को प्रसन्न रखना भी एक कला है |

Updated: April 17, 2021 — 9:42 am

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *